NTPC हादसा: हादसे में अब तक 33 लोगों की मौत

रायबरेली: ऊंचाहार के एनटीपीसी थर्मल पावर प्लान्ट में एक नवंबर को दोपहर करीब 4 बजे हुए हादसे में 33 लोगों की मौत हो गई, जबकि 100 लोग जख्मी हैं। गुरुवार को विक्टिम्स और उनके परिजन से राहुल गांधी ने मुलाकात की। वे सूरत में इलेक्शन कैम्पेन को छोड़कर यहां पहुंचे। बताया जा रहा है कि हादसा बॉयलर पर प्रेशर बढ़ने की वजह से हुआ था। यहां 500 मेगावॉट का छठा नया प्लान्ट 200 मेगावॉट के लोड के साथ चल रहा था।

एनटीपीसी में बॉयलर फंटने से उठता भाप का गुबार।

रायबरेली:
 यहां NTPC के प्लांट में बॉयलर फटने से मरने वालों की संख्या बढ़कर 33 हो गई है।

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इस बीच, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस मामले में राज्य सरकार से छह हफ्ते के भीतर डिटेल रिपोर्ट मांगी है। चार किमी तक सुनाई दी गूंज...?
- ऊंचाहार स्थित एनटीपीसी की 5वीं यूनिट में बुधवार की दोपहर बॉयलर से जुड़े पाइप पर प्रेशर बढ़ने से धमाका हुआ था। यह धमाका इतना जबरदस्त था कि इसकी गूंज 4 किलोमीटर तक सुनाई दी गई थी। कई शव 10 फीट की ऊंचाई पर लटके मिले।
- 90 फिट ऊंचे बॉयलर से कोयले की राख लावा की तरह मजदूरों पर गिर रही थी। पूरी यूनिट भांप और धुएं से भर गई।

NTPC हादसा : मानवाधिकार आयोग ने मांगी रिपोर्ट, मृतकों की संख्या 33 हुई

हादसे के 24 घंटे बाद भी कोई ज्यादा देर तक नहीं ट‍िक पा रहा अंदर
- NTPC प्लान्ट में काम करने वाले एक शख्स ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि प्लान्ट के अंदर का माहौल अभी भी डरावना है। 70 से 80 फीट तक लोहे की जालियों से फ्लोर बने हुए हैं। सीढ़ियों के जरिए जो रास्ता बनाया गया है, वह इतना संकरा है कि उससे एक ही आदमी उतर सकता है।
- रेस्क्यू करने के लिए 50 लोगों की NDRF की टीम लगी थी। लेकिन कहा जा रहा है कि अभी भी मलबा हटाने में 3 से 4 दिन का समय लग सकता है। हर तरफ राख फैली है, लोहा भी सफेद पड़ गया है।
- राहत और बचाव में NDRF की टीम के साथ लगी प्रशासनिक टीम भी अंदर ज्यादा समय तक रुक नहीं पा रही। कई टनल में राख जमा है, जिसमें आग की तेज तपिश है।
- कुछ लाशें तो पूरी तरह से जल चुकी हैं। जो सेफ्टी बेल्ट लगाए लटके थे, उन्हें हादसे के समय हिलने का समय भी नहीं मिला।
- राख और मलबे के ढेर में अभी भी मृतक और घायल हो सकते हैं।

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NTPC के इंजीनियर ने बताए कारण
- एनटीपीसी ऊंचाहार के ही एक इंजीनियर ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया, "करीब 3 महीने पहले यह यूनिट लगी, जहां से 500 मेगावाट बिजली का प्रोडक्शन होता है।"
- उन्होंने बताया कि कोयला जलने के बाद बची राख को ठंडा करके बॉयलर से निकाला जाता है। जहां से यह राख निकलती है, वह वॉल्व बहुत जल्दी चोक हो जाता है। इससे बॉयलर पर प्रेशर बढ़ जाता है और वह फट जाता है। यह हादसा भी शायद इसी वजह से हुआ।

मुआवजे की घोषणा ...
घायलों का रायबरेली, लखनऊ और इलाहाबाद के अस्पतालों में इलाज किया जा रहा है। राज्य सरकार के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख और घायलों को 50-50 हजार रुपए का मुआवजा देने की घोषणा की।
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